Comparing can harm your mental health

कम्पेयर करना यानिकी किसी दुसरे व्यक्ति से स्वयं की तुलना करना जिसमें मुख्य रूप से सामने वाले की सम्पत्ति, सुन्दरता, उपलब्धियां आदि को लेकर तुलना करना शामिल है। मानवों में बचपन से ही तुलना करने की भावना उत्पन्न हो जाती है। जैसे कि एक बच्चा अपने पास खड़े बच्चे के हाथ में एक खिलौना देख कर उसी तरह के खिलौने की मांग करने लगता है। जब भी सफल, अमीर या सुंदर व्यक्ति किसी सामजिक कार्यक्रम में जाता है तो वहाँ दो तरह के लोग मौजूद होते हैं, पहले जो खुद की तुलना उससे करते हैं तथा दुसरे जो उसकी उपलब्धियों की प्रशंसा करते हैं। देखा जाये तो तुलना करने वालो में नकारात्मक भाव ज्यादा पाए जाते हैं। आज आप जानेंगे कि किस प्रकार से कम्पेयर करना आपकी मेंटल हेल्थ को कर सकता है खराब!

कम्पेयर करने से बढ़ सकता है तनाव

कम्पेयर यानि तुलना करने से हम मानसिक रूप से प्रभावित हो सकते हैं। किसी से भी तुलना करना हमारे आत्मविश्वास को कम कर सकता है, और हमें हताश महसूस करवा सकता है। मानव मस्तिष्क इस प्रकार से विकसित है कि वह समाज में लोगो की उपलब्धियों पर ज्यादा ध्यान देता है और यह निश्चित करने की कोशिश करता है समाज में किन उपलब्धियों के बाद प्रसिद्धि पाई जा सकती है जिस कारण तुलना करने की भावना उत्पन्न होती है।

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तुलना करने की भावना अधिकांश लोगो में पायी जाती है। कम्पेयर करना मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालता है। तुलना करना कई बार अच्छा भी महसूस करवाता है क्योंकि जब तुलना उन लोगों के साथ होती है जो कम बेहतर होते हैं जो यह अच्छा महसूस हो सकता है परन्तु तुलना करना एक बुरी आदत है। इसके अलावा उन लोगों से तुलना जो ज्यादा कुशल, सुन्दर या धनवान है तो यह दुःख का कारण बन सकता है। उदाहरण के लिए यदि माता-पिता अपने बच्चे की तुलना दूसरों के साथ करते हैं तो बच्चे को तनाव हो सकता है, या फिर बच्चे भी अपने माता-पिता की तुलना अपने दोस्तों आदि के माता-पिता के साथ कर सकते हैं जिस कारण माता-पिता को उनके कई सवालों का सामना करना पड़ता है। जैसे – “आपने मेरे लिए किया ही क्या है?” आदि। जो माता-पिता में तनाव पैदा करता है ऐसा करना गलत है। यह आपस के प्रेम को कम कर देता है और परिवार में नकारात्मकता आ जाती है।

सोशल मीडिया के कारण तुलना करने की भावना में हुई बढोत्तरी

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल ही के वर्षो में तुलना करने की भावना में काफी बढोत्तरी हुई है जिसका मुख्य कारण सोशल मीडिया है। इन प्लेटफॉर्म्स पर लोग केवल अपनी उपलब्धियां साझा करता हैं ताकि समाज में उन्हें सम्मान मिल सके। जिसके फलस्वरूप अन्य लोगो में यह भाव उत्पन्न हो सकता है कि उनकी तुलना में यह व्यक्ति ज्यादा समृद्ध तथा खुश है और स्वयं के जीवन को दुसरे से कम्पेयर करने के कारण तनाव महसूस हो सकता है। जो लगातार सामाजिक तुलना करते हैं उनमें ईर्ष्या, अफसोस, पश्चाताप जैसी भावना भी जन्म ले सकती है।

सोशल मीडिया को तनाव का कारण इसलिए माना जाता है क्योंकि यहाँ पर अलग-अलग आर्थिक स्थिति वाले लोग मौजूद होते हैं। जिसमे निम्न स्थिति वाले उच्च आर्थिक स्थिति वालों से तुलना करने के कारण अपर्याप्त महसूस करते हैं और अधिक आरामदेह, महँगी और सुंदर वस्‍तुओं के अभाव का संदेह होने के कारण तनाव में जा सकते हैं। तनाव में जाने से उसकी मेंटल हेल्थ प्रभावित हो जाती है और इसका स्तर बढ़ने से अवसाद, अनिद्रा आदि विकार उत्पन्न हो सकते हैं।

ऐसे बचें इस आदत से –

यदि आप कम्पेयर करने की आदत को छोड़ना चाहते हैं, इससे बचना चाहते हैं तो आपको निम्न बातों का ध्यान रखने एवं फॉलो करने की जरूरत है।

सम्पत्ति या उपलब्धियां ही सक्सेस एकमात्र का पैमाना नहीं है

भौतिक संपत्ति हासिल करना या फिर किसी प्रकार की कोई उपलब्धि ही सक्सेस को मापने का एक पैमाना नहीं है। आपको जरूरत है कि आप अपने स्वयं के जीवन, कार्यक्षमता और स्किल्स पर ध्यान दें। केवल वही काम करें जिसमें आपको ख़ुशी मिलती है। किसी और की उपलब्धियां देख उसी के जैसा काम करने का जूनून आपसे आपका सुख चैन और यहां तक कि अभी तक आपने जो कमाया है वो भी छीन सकता है। सक्सेस वही है जिसे प्राप्त करके आपको खुशी महसूस हो और एक संतुष्टि मिले।

आपके पास जो है उसके लिए भगवान को धन्यवाद करें

हाँ माना कि आपके पड़ोसी के पास आपसे ज्यादा पैसा है लेकिन जितना आपके पास है उतना भी कई लोगों के पास नहीं है। तो अपने आप में संतोष करें। जो आपके पास है उसके लिए धन्यवाद कहें। केवल वही कार्य करें जिससे आपको संतुष्टि मिले और आपका मानसिक स्वास्थ्य भी ठीक रहे।

किसी से सलाह लें

यदि आप कितने ही प्रयास करने के बाद भी अपना तुलना करने वाला स्वभाव नहीं छोड़ पा रहे हैं तो अपने किसी मित्र या प्रियजन से इस पर चर्चा करें या किसी मनोवैज्ञानिक से सलाह मशवरा करें।

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Shubham Jadhav
शुभम एक प्रोफेशनल कंटेंट एवं कॉपी राइटर हैं जो ग्राफ़िक्स डिज़ाइन, SEO और डिजिटल मार्केटिंग का भी ज्ञान रखते हैं। शुभम 11 सालों से इसी फील्ड में कार्यरत हैं, इन्होंने टेक्नोलॉजी, एंटरटेनमेंट, गैजेट्स एवं अन्य अलग-अलग विषयों पर अपने विचारों को ब्लॉग पोस्ट्स में पिरोया है। हायर एजुकेशन के साथ ही वे डिजिटल दुनिया से जुड़ चुके थे और इसी को उन्होंने अपना पैशन बनाया। इन्होने विक्रम विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। अपने कुछ व्यक्तिगत अनुभवों को मद्देनज़र रखते हुए और मेंटल हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देने के लिए भूमिका गेहलोत एवं नितेश हरोड़े के साथ मिलकर उन्होंने सुकूनमंत्रा को शुरू किया।

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