Texting Anxiety

Texting Anxiety : एंग्जायटी कई तरह की होती है। जैसे जनरलाइज्ड एंग्जाइटी, सोशल एंग्जायटी, एग्जाम एंग्जायटी आदि। पर क्या आप जानते हैं कि किसी से चैट करते समय भी एंग्जायटी हो सकती है जिसे टेक्स्टिंग एंग्जायटी का नाम दिया गया है! बहुत से लोग इस एंग्जायटी के शिकार हैं परन्तु उन्हें इस एंग्जायटी के बारे में कुछ जानकारी नहीं है ही नहीं! इस कारण वह इसके लक्षणों और निवारण पर ध्यान नहीं देते हैं। कहीं आपको तो Texting Anxiety नहीं हैं? इस एंग्जायटी के कई लक्षण होते हैं जिसमें मुख्य लक्षण किसी व्यक्ति से चैट करते समय बैचेनी होना है। आइये जानते हैं टेक्स्टिंग एंग्जायटी के लक्षण क्या-क्या हो सकते हैं और इन्हें किस तरह से पहचाना का सकता है?

टेक्स्टिंग एंग्जायटी के लक्षण

संदेश को बार-बार पढ़ना

यदि आप किसी सन्देश को भेजने से पहले बार-बार पढ़ते हैं तो यह Texting Anxiety का लक्षण हो सकता है। एक एंग्जायटी से पीड़ित व्यक्ति टेक्स्ट करने के बाद उस मैसेज को कई बार पढ़ता है और इस बात की पुष्टि करता है कि उसने मैसेज में किसी भी प्रकार की कौई गलती तो नहीं की है? ऐसे लोगों में किसी भी व्यक्ति से टेक्स्टिंग करते समय आत्मविश्वास की कमी होती है और यह अपने ही द्वारा टाइप किये गये मैसेज को बार-बार पढ़ते हैं। अपने ही मैसेज में ग्रामर की मिस्टेक को चेक करने के बाद ही मैसेज को सेंड करते हैं।

यहां क्लिक कर सुकूनमंत्रा के WhatsApp Channel से जुड़िये।

हर मेसेज में Emoji का उपयोग

अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए हर मैसेज के साथ एमोजी को जोड़ना भी टेक्स्टिंग एंग्जायटी के लक्षण के अंतर्गत आता है। Texting Anxiety में लोग ऐसा सोचते हैं कि सामने वाला शायद उनके मैसेज को सही तरह से नहीं समझ सकेगा, जिस भावना से उन्होंने वह मैसेज भेजा है उसे नहीं समझ पायेगा। इसीलिए वह हर मैसेज के बाद में या फिर बीच में एमोजी को लगाकर अपनी भावना व्यक्त करने का प्रयास करता है। टेक्स्ट करते समय व्यक्ति के दिमाग में कई तरह के विचार आ सकते हैं। जैसे कि “यदि सामने वाला मेरे मैसेज को नहीं समझ सका तो!” या “क्या पता वह मेरी फीलंग को समझेगा या नहीं?” इस तरह के प्रश्न टेक्स्टिंग एंग्जायटी के लक्षण हो सकते हैं।

Explain करना

अगर आप अपने ही मैसेज को Explain करते हैं और कम शब्दों में कही जाने वाली बातें भी बड़ा-चड़ा कर बताते हैं तो यह टेक्स्टिंग एंग्जायटी के अंतर्गत आता है। यदि आपके मन में टेक्स्ट को सेंड करने के बाद यह प्रश्न आता है कि सामने वाला आपकी बातों को कम शब्दों में नहीं समझेगा या बात का कुछ और ही मतलब निकाल सकता है तो यह टेक्स्टिंग एंग्जायटी का एक लक्षण है। इस एंग्जायटी में व्यक्ति अपनी कही गयी बातों को ही दोहराता है और बार-बार उन संदेशो को अलग-अलग प्रकार से लिख कर सेंड करता है।

माफ़ी मांगना

टेक्स्टिंग एंग्जायटी का एक लक्षण यह भी है कि व्यक्ति अपने ही मैसेज के बाद माफ़ी मांगता है और प्रतिक्रिया जाने बिना ही माफ़ी मांगना शुरू कर देता है। व्यक्ति को संदेह होता है कि उसके द्वारा पूछा गया प्रश्न कही गलत तो नहीं है?, या सामने वाले को इस प्रश्न से बुरा तो नहीं लग जाएगा? आदि। इसीलिए Texting Anxiety में व्यक्ति प्रश्न पूछने के तुरंत बाद ही माफ़ी मांग सकता है। उदहारण के तौर पर व्यक्ति पूछता है कि किस समय आपके यहां आना है? फिर अगला मैसेज करेगा कि मैं भूल गया प्लीज माफ़ करदो और इस प्रकार के कई बेवजह के सॉरी मैसेज सेंड कर देता है।

Reply का इंतजार

यदि आप किसी मैसेज करने के तुरंत बाद रिप्लाई की उम्मीद रखते हैं या फिर किसी भी व्यक्ति के मैसेज का कई दिनों तक जवाब नहीं देते हैं, तो हो सकता है आपको भी टेक्स्टिंग एंग्जायटी की समस्या हो। टेक्स्टिंग एंग्जायटी में व्यक्ति रिप्लाई न मिलने पर बैचेनी महसूस करता है या फिर लोगों को मैसेज करने से या रिप्लाई करने से बचने की कोशिश करता है। इन लोगों में Reply को लेकर कई तरह की अवधारणा हो सकती है। जैसे रिप्लाई न मिलने पर यह सोचना कि “मैंने शायद कुछ गलत कह दिया?” “मुझे यह प्रश्न नहीं करना चाहिए था?” आदि।

निवारण

टेस्टिंग एंग्जायटी वैसे तो एक सामान्य बात है। किन्तु अगर आपको यह हर बार ही हो रही है तो यह आपके दूसरे काम भी बिगाड़ सकती है। आप अपने संदेशों के चक्कर में रहकर दूसरे काम नहीं कर पाएंगे या किसी भी सामान्य से मैसेज की वजह से चिढ़कर काम को बिगाड़ देंगे। वैसे ऐसी कोई दवा तो है नहीं जिससे आप इस समस्या से उभर पाएं और ना ही कोई ऐसा सीधा तरीका है जिससे आप इससे बच सकते हैं। लेकिन हाँ अगर आप अपनी ओवरऑल ओवरथिंकिंग और एंग्जायटी पर काबू पा लें तो आप इस समस्या से भी छुटकारा पा सकते हैं। निचे दी हुई लिंक्स इसमें आपकी सहायता कर सकती है।

यह भी पढियें:

Previous articleखराब मूड को ठीक करने के 5 प्रैक्टिकल तरीके
Next articleकहीं आपकी थकान का कारण मानसिक तनाव या डिप्रेशन तो नहीं?
Shubham Jadhav
शुभम एक प्रोफेशनल कंटेंट एवं कॉपी राइटर हैं जो ग्राफ़िक्स डिज़ाइन, SEO और डिजिटल मार्केटिंग का भी ज्ञान रखते हैं। शुभम 11 सालों से इसी फील्ड में कार्यरत हैं, इन्होंने टेक्नोलॉजी, एंटरटेनमेंट, गैजेट्स एवं अन्य अलग-अलग विषयों पर अपने विचारों को ब्लॉग पोस्ट्स में पिरोया है। हायर एजुकेशन के साथ ही वे डिजिटल दुनिया से जुड़ चुके थे और इसी को उन्होंने अपना पैशन बनाया। इन्होने विक्रम विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। अपने कुछ व्यक्तिगत अनुभवों को मद्देनज़र रखते हुए और मेंटल हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देने के लिए भूमिका गेहलोत एवं नितेश हरोड़े के साथ मिलकर उन्होंने सुकूनमंत्रा को शुरू किया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here