Stress management and blood pressure

Stress management and blood pressure: हर किसी के जीवन में स्ट्रेस यानि तनाव की वजह अलग-अलग होती है। स्ट्रेस अक्सर तब शुरू होता है जब आप कुछ नया या अप्रत्याशित अनुभव करते हैं जो आपको या आपकी भावनाओं को खतरे में डालता है या जब आपको लगता है कि किसी स्थिति पर आपका नियंत्रण कम है। तनाव से सामना करने की क्षमता आपके आनुवंशिकी, प्रारंभिक जीवन की घटनाओं, व्यक्तित्व और सामाजिक परिस्थितियों के साथ-साथ आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर हो सकती है।

आसान भाषा में बात करें तो जब आप किसी बात का दबाव महसूस करते हैं या किसी मुश्किल परिस्थिति का सामना करते हैं तो इसकी प्रतिक्रिया के रूप में जो आपका शरीर रिस्पांस करता है उसे स्ट्रेस कहते हैं। शरीर का स्ट्रेस लेना बहुत ही नार्मल सी प्रक्रिया है। लेकिन जब यह हद से ज्यादा बढ़ जाता है तो ये कई सारी समस्याओं की वजह बन जाता है। इनमें से एक है हाइपरटेंशन!

जब आप जरुरत से ज्यादा या फिर कह दें कि लगातार स्ट्रेसफुल या तनावग्रस्त महसूस करते हैं तो आप हाइपरटेंशन यानि हाई ब्लड प्रेशर की चपेट में आ सकते हैं। ऐसे में स्ट्रेस को मैनेज करना बहुत ही आवश्यक है। आज हम चर्चा करेंगे कि किस तरह से आप अपना स्ट्रेस लेवल मैनेज करके हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को अपने जीवन में आने से पहले ही रोक सकते हैं या फिर पहले से बड़े हुए ब्लड प्रेशर को संतुलित कर सकते हैं।

स्ट्रेस के लक्षण

कई बारी आप समझ नहीं पाते कि आपको हो क्या रहा है… यदि आपके जीवन में स्ट्रेस है तो ये लक्षण आप देख सकते हैं –

  • सीने में दर्द या ऐसा लगना जैसे दिल की धड़कन बहुत बढ़ गई हो
  • थकावट या सोने में परेशानी महसूस होना
  • सिरदर्द, चक्कर आना या कंपकंपी
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • मांसपेशियों में तनाव या जबड़े का अकड़ना
  • पेट और पाचन संबंधी समस्याएं होना

हाई बीपी कंट्रोल करने के लिए जरूरी है स्ट्रेस मैनेजमेंट। अपनाएं ये 7 तरीके…

हाइपरटेंशन को काम करने का सबसे कारगर तरीका है स्ट्रेस को मैनेज करना। डॉक्टर्स भी आपको इसी की सलाह देते हैं। आप निचे दिए हुए इन 7 तरीकों को अपनाकर स्ट्रेस मैनेज करते हुए ब्लड प्रेशर को संतुलित कर सकते हैं।

भरपूर नींद लें

यदि आप पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं तो इसका सीधा असर आपके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। अपर्याप्त या खराब गुणवत्ता वाली नींद आपके मूड, मानसिक सतर्कता, ऊर्जा स्तर और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। कम से कम 7 घंटे की नींद हर वयस्क व्यक्ति के लिए आवश्यक है। जब नींद पूरी नहीं होती तो हर काम से चिढ होने लगती है और यह स्ट्रेस का कारण भी बन सकता है। इसलिए आप भरपूर नींद लीजिये और अपने शरीर के साथ साथ मन को भी स्वस्थ रखिये। यदि आप ठीक से सो नहीं पा रहे या आपको सोने में कठिनाई हो रही है, तो आप अपनी डाइट में कैफीन की मात्रा को कम करने का प्रयास कर सकते हैं। इसके साथ ही आप सोने से पहले बहुत अधिक स्क्रीन समय से बच सकते हैं। सोने से 30 मिनट पहले फ़ोन या कंप्यूटर बंद कर दें। इससे आपको काफी फायदा होगा।

रिलैक्सेशन तकनीकों को अपनाना

यदि आपका मन शांत रहेगा तो आपको तनाव होगा ही नहीं और यदि आपको तनाव नहीं होगा तो आपको ब्लड प्रेशर की शिकायत नहीं होगी। उन तकनीकों पर ध्यान दें जो आपके मन को शांत कर सकती हैं। जैसे आप ध्यान, स्ट्रेचिंग, गहरी साँस लेने वाले व्यायाम और योग कर सकते हैं। यह सब अपने आप को तनाव मुक्त रखने की बहुत अच्छी तकनीक है। यदि आप ये सब न कर पाएं तो एक शांत जगह पर बैठ कर अपनी आँखे बंद कर के अपनी सासों पर ध्यान दीजिये।

इसके साथ-साथ आप शारीरिक व्यायाम भी कर सकते हैं। शारीरिक व्यायाम आपके मूड को बेहतर बनाने वाले एंडोर्फिन नामक हार्मोन्स का उत्पादन करके तनाव के प्रभावों को कम करने में मदद कर सकता है। व्यायाम करने का मतलब जीम जाना ही नहीं बल्कि आप सप्ताह में तीन से पांच दिन 15-20 मिनट तक चलने का भी लक्ष्य रख सकते हैं।

सकारात्मक लोगों से जुड़िये

अपने सामाजिक नेटवर्क को मजबूत करें। ऐसे लोगों से जुड़े रहें जो आपको शांत रखने के साथ ही खुश रखना भलीभाँति जानते हों, हर परिस्थिति में आपको भावनात्मक समर्थन देते हो। परिवार का कोई सदस्य, कोई दोस्त या पड़ोसी जो बड़ी जिम्मेदारी से आपको सुन सकता है और स्ट्रेस को मैनेज करने में सहायता कर सकता हो उससे बात करें। इसके अलावा कुछ नए लोगों से भी मिलें और बात करने की कोशिश करें। आपके यदि ज्यादा दोस्त नहीं हैं तो आप किसी ग्रुप में शामिल हो सकते हो जिसमें मौजूद सदस्य सकारात्मक सुझाव देते हों और अच्छी बातें करते हो।

स्वयं के लिए समय निकालें

आप अपनी दिनचर्या में से अपने आप के लिए थोड़ा समय अवश्य निकालें। इस समय में ऐसा कुछ करें जिससे आपको ख़ुशी मिलती हो, जो आपको अच्छा लगता हो। यदि आपको पढ़ने में रूचि है तो कोई भी किताब लेकर पढ़ने लग जाईये, यदि आपको खाने में रूचि हो तो कुछ नया बना कर खा सकते हैं या कही बाहर खाने चले जाईये।

दिनभर में बहुत सी अच्छी-बुरी बातें होती है। दिन भर में किये गए अच्छे कामों के लिए खुद को श्रेय अवश्य दें। अपने द्वारा किये गए अधूरे काम को पूरा करने के लिए अपने आप को प्रोत्साहित करें। सकरात्मक बातों पर और सकारात्मक सोच पर अधिक ध्यान दें।

सोल्यूशन पर दीजिये ध्यान

हर दिन कोई न कोई घटना हो जाती है या फिर समस्या आ ही जाती है। ये होना काफी नार्मल सी बात है लेकिन अगर आप इसका स्ट्रेस लेकर बैठ जाते हैं तो ये आपके लिए समस्या का कारण बन सकता है। आप समस्या के आने पर उसके समाधान के बारे में सोचिये अगर कोई समाधान हो सकता है तो बहुत अच्छी बात है, बस चिंता मत करिये। इन तनावपूर्ण स्थितियों को बढ़ने न दीजिये। लेकिन कुछ परिस्थितियां ऐसी भी होती है जिनका समाधान आपके हाथ में नहीं होता। जिन हालातों को आप नहीं बदल सकते, उनके बारे में चिंता करना छोड़ देना ही बेहतर है। यदि कोई पारिवारिक समस्या है तो उसका हल ढूंढें। कोई बात आपको परेशान कर रही हो तो वह किसी के साथ साझा कर लीजिये। 

आप पारिवारिक समस्या-समाधान सत्र आयोजित कर सकते हैं और घर एवं कार्यस्थल पर बातचीत कौशल (कम्युनिकेशन स्किल्स) का उपयोग करिये। कई बार हम बिना बात के भी टेंशन लेने लगते हैं जैसे कि हमने किसी के साथ बुरा कर दिया है लेकिन बहुत सी बार ऐसा होता है कि वह व्यक्ति आपके लिए ऐसा कुछ सोच ही नहीं रहा होता। यह सिर्फ और सिर्फ आपके दिमाग की उपज होती है जिसे ओवरथिंकिंग का नाम दिया गया है। ऐसी स्थिति में आप बात कर के तनाव होने से स्वयं को बचा सकते हैं।

लाइफस्टाइल में बदलाव करिये

लाइफस्टाइल में बदलाव के जरिये अपने आप को आप आनंद का अनुभव करवा सकते हैं और स्ट्रेस को मैनेज कर सकते हैं। एकदम से बहुत बड़ा चेंज करने की जरूरत नहीं है। आप छोटी-छोटी चीज़ों से शुरू कर सकते हैं। आप ने बहुत सी सकारात्मक बातें सुनी और पढ़ी होंगी उन बातों को अपनाने की कोशिश करिये। उदाहरण के लिए, सुबह उठते ही अपने इष्टदेव को प्रणाम करें, नित्यकर्म करने के बाद पूजा पाठ करें,  खाने का समय निश्चित करें, खाना धीरे-धीरे और चबा कर खाएं, फ़ोन का कम से कम उपयोग करें, ध्यान और व्यायाम करें। इनमें से आपने बहुत सी बातें सुनी या पढ़ी होंगी लेकिन कुछ ही बातों पर आपने अमल किया होगा। अपने आप को खुश रखना बहुत ही आवश्यक है। आप जो भी काम करें उसमें आनंद का अनुभव करिये।

मदद मांगने से न डरें

जब भी आप चिंतित हों और कुछ समझ नहीं आ रहा तो आप अपने जीवनसाथी, दोस्तों और पड़ोसियों से मदद मांग सकते हैं। अपने लोगो से मदद मांगने में बिलकुल भी ना कतराए। हो सकता है उनसे बात करके आपको आपने तनाव से शांति मिले? यदि तनाव और चिंता बनी रहती है, तो आप किसी साइकोलोजिस्ट से बात करें। साइकोलोजिस्ट आपकी बातों को सुन कर आपको आपकी परेशानी के हिसाब से आपको सॉलूशन देंगे। उनकी बात ध्यान से सुनें और अमल करने की कोशिश करें। तनाव और चिंता किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता।  

निष्कर्ष

स्ट्रेस यानि तनाव कम करने तथा बड़े हुए ब्लड प्रेशर को संतुलित करने के लिए इन तरीकों के साथ-साथ, एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। स्वस्थ जीवन शैली में अपना स्वस्थ वजन बनाए रखें, धूम्रपान और नशा न करें, नियमित योग और व्यायाम करें, ऐसे आहार का सेवन करें जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज, प्रोटीन और स्वास्थ्यवर्धक वसा शामिल हो। पुरानी बातों को सोच सोच कर अपने दिमाग को व्यथित न करें। बहुत अधिक सोचना और तनाव लेना ही उच्च रक्तचाप को जन्म देता है।

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