पॉजिटिव माइंडसेट अपनाने के 8 तरीके

सकारात्मकता का मतलब सिर्फ मुस्कुराना और खुश दिखना नहीं होता है। सकारात्मकता जीवन के बारे में दृष्टिकोण और जीवन में जो कुछ भी अच्छा है उस पर ध्यान केंद्रित करने की प्रवृत्ति है। पॉजिटिव माइंडसेट के साथ काम करने से आपको लंबे समय में अधिक लाभ होगा। सकारात्मक दृष्टिकोण रखने का मतबल है कि हर स्थिति में अपने बारे में आशावादी रहना। सकारात्मक दृष्टिकोण वाले लोग हमेशा हर परिस्थिति में आशावादी रहते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी सकारत्मक निर्णय लेते हैं। इसके विपरीत नकारात्मक दृष्टिकोण वाले लोग अधिक निराशावादी हो सकते हैं और आमतौर पर कठिन परिस्थितियों में सबसे खराब संभावित परिणाम की उम्मीद करते हैं। पॉजिटिव माइंडसेट ही सकारात्मक रहने में मददगार है। आशावादी होने के लिए अपने विश्वासों को बदलने की आवश्यकता है। सकारात्मक विश्वास अधिक सकारात्मक परिणामों की ओर ले जाता है, जो बाद में और अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण को जन्म देते है।

हमें सकारात्मकता को बढ़ावा देने की जरूरत है। आज के समय में नकारात्मकता बहुत बढ़ चुकी है। इससे निपटारा पाने के लिए हमीने कई प्रकार की चीजो की जरूरत है जैसे- हमें उत्साह बढ़ाने, आपसी सहयोग को बढ़ाने की, खुशी को बढ़ावा देने की, प्रशंसा को बढ़ावा देने की जरूरत है। साथ ही हमें Appreciativeness को बढ़ावा देने की भी जरूरत है।

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पॉजिटिव माइंडसेट अपनाने के 8 तरीके

अगर आप पॉजिटिव माइंडसेट अपनाना चाहते हैं तो आपको निचे दिए तरीकों पर ध्यान देना चाहिए। ऐसा करने से आपके जीवन में आये बदलाव आपको सकारत्मक ऊर्जा के साथ जीने की शक्ति देंगे और हर परिस्थिति में अच्छे Result देखने को मिलेंगे। आइये जानते हैं कि उन तरीकों के बारें में –

सकारात्मक बातों पर ध्यान दें

हम क्या सोचते हैं और किस प्रकार की बातों पर ज्यादा ध्यान देते हैं, यह सब किसी भी व्यक्ति के माइंडसेट को दर्शाता है कि वह किस प्रकार की थिंकिंग रखता है, अगर अच्छी बातों पर ध्यान दिया जाए तो सोचने के तरीकों में भी बदलाव आ सकते हैं और पॉजिटिविटी बढ़ सकती है। कोशिश करें कि अच्छी, खुश करने वाली सकारात्मक बातों पर ज्यादा ध्यान दिया जाए।

नकारात्मकता क्षेत्रों की पहचान करें

अगर आप अपने आपको सकारात्मक लोगों के साथ रखेंगे तो वो आपको Inspire और Encourage करेंगे। जो आपको पॉजिटिव माइंडसेट अपनाने में मददगार होगा, जितना हो सके ऐसे Groups को चुनें जो आपके आत्मविश्वास को कम न करते हों। अपने आपको नकारात्मक लोगों और स्थितियों से दूर रखें।

लक्ष्य निर्धारित करें

प्राप्त करने योग्य लक्ष्य निर्धारित करने से आपको एक पॉजिटिव माइंडसेट बनाए रखने में मदद मिलेगी। बिना लक्ष्यों के आप सही रास्ते की पहचान नहीं कर सकेंगे और पॉजिटिव माइंडसेट नहीं अपना पाएँगे। आपने सुना ही होगा कि “खाली दिमाग शैतान का घर होता है”, तो अगर अगर लक्ष्य नहीं होंगे तो बुरी आदतें और नकारात्मक विचार जल्द ही आपको अपना शिकार बना लेंगे।

छोटी-छोटी चीजों में खुशी ढूंढे

जीवन में छोटी-छोटी खुशियों पर ध्यान दें। जैसे कि अपनों के साथ समय बिताना, अच्छी किताब का आनंद लें या प्रकृति में सैर करें। ऐसा करने से शरीर में पॉजिटिविटी का संचार होता है। अपनों के साथ समय बिताने से सकारात्मकता बढ़ती है और एक पॉजिटिव माइंडसेट रखने की कोशिश में काफी हद तक मदद मिल जाती है। छोटी छोटी चीजों से मिलने वाली खुशी को नज़रअंदाज न करें और केवल बड़े उत्सवों का इंतजार न करें।

चुनौतियों से सीखें

चुनौतियों को बाधाओं के रूप में देखने के बजाय उन्हें सीखने और बढ़ने के अवसरों के रूप में देखें। समाधानों की तलाश करें और उन्हें दूर करने के लिए कार्य करें, खासकर चुनौतियों से सीखें ताकि अगली बार इस प्रकार की कोई भी Problem आये तो उससे आसानी से निपटा जा सके। पॉजिटिव माइंडसेट आपको चुनौतियों से लड़ने की ताकत देता है और आपको इससे आसानी से बाहर निकाल सकता है।

दयालु बनें

दूसरों के प्रति दयालुता का कार्य आपकी अपनी मानसिकता पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसके लिए आप कई तरीके भी अपना सकते हैं। जैसे तारीफ करना या किसी जरूरतमंद की मदद करना। दयालु बनने से आपके नकारात्मक विचार रातोंरात गायब नहीं होंगे, लेकिन प्रयास से आप अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण रखने के लिए खुद को तैयार कर सकते हैं।

अनुशासन को अपनाएं

Self discipline जीवन में बदलाव लाने के लिए तथा एक पॉजिटिव माइंडसेट अपनाने के लिए बेहद जरुरी है। अनुशासन से काम आसान हो जाते हैं तथा कार्य को पूर्ण करने और सफल होने में भी Self discipline अहम भूमिका निभाता है।

Positive self-talk

Self-talk अर्थात स्वयं से बातें करना। कभी भी खुद की दूसरों से तुलना न करें और जितना हो सके Positive self-talk करें। जिसमे आप खुद से पॉजिटिव बातें कह सकते हैं। सकारात्मक आत्म-चर्चा के उदाहरण हैं, “मैं खुश हूँ,” “मैं अच्छा कर रहा हूँ,” या “यह बहुत अच्छा नहीं है, लेकिन यह और भी बुरा हो सकता था”, “मैं यह कर सकता हूँ.” आदि।

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Shubham Jadhav
शुभम एक प्रोफेशनल कंटेंट एवं कॉपी राइटर हैं जो ग्राफ़िक्स डिज़ाइन, SEO और डिजिटल मार्केटिंग का भी ज्ञान रखते हैं। शुभम 11 सालों से इसी फील्ड में कार्यरत हैं, इन्होंने टेक्नोलॉजी, एंटरटेनमेंट, गैजेट्स एवं अन्य अलग-अलग विषयों पर अपने विचारों को ब्लॉग पोस्ट्स में पिरोया है। हायर एजुकेशन के साथ ही वे डिजिटल दुनिया से जुड़ चुके थे और इसी को उन्होंने अपना पैशन बनाया। इन्होने विक्रम विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। अपने कुछ व्यक्तिगत अनुभवों को मद्देनज़र रखते हुए और मेंटल हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देने के लिए भूमिका गेहलोत एवं नितेश हरोड़े के साथ मिलकर उन्होंने सुकूनमंत्रा को शुरू किया।

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